Friday, 2 September 2016

इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक

इस्लाम और पर्यावरण: एक झलक

जल और थल में बिगाड़ फैल गया खुद लोगों की ही हाथों की कमाई के कारण, ताकि वह उन्हें उनकी कुछ करतूतों का मजा चखाए, कदाचित वे बाज आ जाएं।   (कुरआन-30:41)
पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया अगर कयामत आ रही हो और तुम में से किसी के हाथ में कोई पौधा हो तो उसे ही लगा ही दो और परिणाम की चिंता मत करो।

पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया-जिसने अपनी जरूरत से ज्यादा पानी को रोका और दूसरे लोगों को पानी से वंचित रखा तो अल्लाह फैसले वाले दिन(बदला दिया जाने वाले दिन) उस शख्स से अपना फज्लो करम रोक लेगा।
पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया-जो बंदा कोई पौधा लगाता है या खेतीबाड़ी करता है। फिर उसमें से कोई परिंदा,इंसान या अन्य कोई प्राणी खाता है तो यह सब पौधा लगाने वाले की नेकी(पुण्य) में गिना जाएगा।
पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया-जो भी खजूर का पेड़ लगाएगा, उस खजूर से जितने फल निकलेंगे, अल्लाह उसे उतनी ही नेकी देगा।

पैगम्बर मुहम्मद सल्ल. ने फरमाया- जिस घर में खजूर का पेड़ हो, वह भुखमरी से परेशान नहीं हो सकता।

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