Sunday, 4 September 2016

इस्लाम में दिल की अहमियत

आज विश्व हदय दिवस है। इस मौके पर पेश है इस्लाम में दिल संबंधी दी गई कुछ हिदायतें-

अल्लाह का डर रखो। निसन्देह अल्लाह दिलों तक की बातें जानता है। कुरआन ५:७

जिसे अल्लाह सीधे रास्ते पर लाना चाहता है,उसका दिल ईश्वरीय आदेशों के लिए खोल देता है और जिसे पथभ्रष्ट करना चाहता है,उसके दिल को तंग कर देता है। कुरआन-६:१२५

ताकि जो लोग परलोक को नहीं मानते,उनके दिल शैतान की ओर झुके और वे उसे पसंद कर लें और जो कमाई उन्हें करनी है कर लें। कुरआन-६:११३

ए लोगों तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से नसीहत आ चुकी है,और दिलों की बीमारियों की दवा और आस्था रखने वालों के लिए मार्गदर्शन और दयालुता। कुरआन-१०:५७ 

अल्लाह जानता है जो कुछ तुम लोगों के दिलों में है और अल्लाह जानने वाला और सहनशील है। कुरआन-३३:५१

अल्लाह ही है जिसने ईमान वालों के दिलों को सुकून पहुंचाया ताकि उनका ईमान और बढ़ जाए। कुरआन-४८:४
जो दिलवाला है या कान लगाकर दिल से सुनता है, उसके लिए इन बातों में शिक्षा है। कुरआन-५०:३७

जो कोई अल्लाह पर ईमान लाए,वह उसके दिल को राह दिखा देगा। और अल्लाह हर चीज को भलीभाति जानता है। कुरआन-६४:११ 

सुन लो अल्लाह के स्मरण से ही दिलों को इत्मीनान हासिल होता है। कुरआन-१३:२८

दिल और हदीस
अल्लाह से बहुत ज्यादा दूर वे लोग हैं जो सख्त दिल वाले हैं। हदीस- तिर्मिजी

मुहम्मद सल्ल़ दुआ मांगते- ए दिलों को पलटने वाले अल्लाह, मेरे दिल को अपनी आज्ञापालन पर जमा दे। हदीस-हुसने हसीन

आप सल्ल ने दिलों पर लगी जंग और नापाकी को दूर करने का तरीका यह बताया-
मौत को अक्सर याद करो और कुरआन पढ़ते रहो। हदीस-बैहकी फी शिबउल ईमान
यतीम के सिर पर हाथ फेरा करो और दरिद्र को खाना खिलाया करो इससे तुम्हारा दिल नरम होगा। हदीस अहमद

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